गुफ्तगू
बचपन में जहाँ हर वक्त यार और दोस्तों से घिरे रहते थे. किसी के घर खाते थे तो किसी के खेत में मटरगस्ती करते घुमते थे. किसी चौराहे पर यूं ही घंटों बैठे गप्प मारते थे तो कभी किसी पुलिया पर बैठ शाम बिताते थे.
बचपन में जहाँ हर वक्त यार और दोस्तों से घिरे रहते थे. किसी के घर खाते थे तो किसी के खेत में मटरगस्ती करते घुमते थे. किसी चौराहे पर यूं ही घंटों बैठे गप्प मारते थे तो कभी किसी पुलिया पर बैठ शाम बिताते थे.
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